I used to think Zahir = Obvious
हम रोज मिल रहे थे
अरमां खिल रहे थे
आपने प्यार जाहिर भी किया
या मैंने कुछ गलत समझ लिया
मैं तो दिल दे चुकी थी
मुझे ऐसी उम्मीद भी न थी
कि ये चार दिन की चांदनी थी
काली रात अभी बाकी थी
मुझे बीच मझधार में छोड़
खुद साहिल पे जा बैठे आप
#जाहीर
not in competition.
SS from USA