My New Poem...!!!!
यारों यह पागल पगला-सा दिवाना-सा
मासूम-सा ज़िंदा दिल अपना कहता है
ग़र लिखना ही है दोस्त कुछ तो एसा न
लिखो कि पस्ती मोल वह बिक जाएँ
ग़र लिखना ही है कलाम तो कुछ एसा
लिखोकि सिर्फ़ नाम आपका आए ओर
कलाम के बाज़ार में भी तहलका-सा
कुछ अजीब-ग़ज़ब-सा मच जाए कि
बस नाम आपका कलाम में आते ही
कलाम के हर लफ़्ज़ का वजन बढ़ जाएँ
ज़ाहिर मायनों से तो ख़बरदार हर दिल
बात तब ख़ामोश लफ़्ज़ बात कह जाएँ
प्रभु भी कहाँ कुछ हम से कहते दिखें है
पर अनकही हर बात समझ आ जाएँ.!!
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