जो चला गया है,
उसे लेकर मन में ये मोहजाल कैसा।
जो अभी हुआ ही नही (या किंचित होगा भी नहीं),
उसे लेकर ये चिंताओं का भूचाल कैसा।
अगर मान चूका है उस ईश्वर को,
और समर्पित कर चूका है उसे अपना हर कर्म,
फिर उसके असतित्व को लेकर ये दुविधा भरे मन में सवाल कैसा।
आप पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।
जय श्री कृष्ण।