#सुनो
सोचती हूँ फायदा क्या प्रतियोगिता में भाग का शब्दों का कोई मोल न, भावों का कोई तोल न जीतती तस्वीर है जीवन की जो दरकार है तस्वीर ही साकार, शब्दों को न स्थान है कविता तो केवल नाम है सुनने की फुरसत है नही सब व्यस्त , समय की है कमी चल रहा व्यापार है तस्वीर की भरमार है .
लिए... मातृभारती