सुदंर कविता ..
विषय .खुशी ..
दुर्भावना लेकर दिल ,तू क्यूं जलायें ।
सद्भावना देकर दिल ,में सुकून क्यूं न पायें ।।
मानवता से मन को ,तू उज्ज्वल क्यूं न बनायें ।
भाईचारे की प्रीत ,तू दिल से क्यूं न निभायें ।।
नफरत लेकर दिल ,को तू क्यूं फिर जलायें ।
प्रीत की गंगा में ,गोते क्यूं तू न लगाये ।।
मुँह से दो मीठे ,बोल सब को तू क्यूं न सुनाये ।
पराये को भी अपना ,पल में तू क्यूं न बनायें ।।
क्या लेकर जायेगा तू ,यह क्यूं न दिल से सोचें ।
किसी के दिल में ,अपनी जगह क्यूं न बनायें ।।
अपने देह को जरा ,परोपकार में तू क्यूं न लगायें ।
जीवन भर की खुशी ,तू पल में क्यूं न पायें ।।
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