सुदंर रचना ,बेटी ......
बाबुल मैं तेरे महकते उधान का खुशबुदार फुल हूँ ।
मैं तेरे रुप की प्रति मूर्ति हूँ ।।
मैं तो कोमल काया ,तरुणी ,ममता की परिकल्पना हूँ ।
मैं तो तेरे सुख दुःख की सदा साथी हूँ ।।
मैं तो परिवार की ममता भाई की राजदुलारी हूँ ।
तुझसे कुछ नहीं मांगती बाबुल तेरी छाया हूँ ।।
मैने कोई अपराध नही किया फिर भी क्यूं पराई हूँ ।
मुझे मारने से तुझे क्या मिलेगा ,मैं तो कोमल काया हूँ ।।
मुझे भगवान ने भेजा तेरे आंगन महकाने को ।
फिर मुझे पराया तु क्यूं समझे बेगानी जग की माया में ।।
मेरे से ही जग चलता है ,मै संसार में व्याप्त हूँ ।
बेटी ,बहना ,दीदी ,माँ ,दादी ,नानी के रुप में व्याप्त हूँ ।।
तेरे दुःखों में साथ निभाने दूर से चल कर आई हूँ ।
मुझे अपनाले बाबुल मैं तो तेरी ही छाया हूँ ।।
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