हर शख्स हर शख्सियत को यहां ...
कहां समझता है ..
अपनी मुश्किलें तमन्नाएं कोई और कहां ...
समझ पाता है ...
आंखों के ख्वाब ...
अरमां बेताब ...
सब कुछ हां सब कुछ जनाब ...
दिल के पत्थर में ही समा जाता है...
यू मान लिया जाए की...
जिंदगी हालात और जज्बात के बीच एक..
कच्चा समझौता है...