मेरे बाबा,
तु ही बता मै तेरे द्वारे, द्वारका माई, कैसे आऊ
दिल में जो है, शब्दों में उसे मै ढाल न पाऊं ;
ओ साई, तुझे छोड़ के जाऊं तो कहां जाऊं ?
लिखा कुछ, पकड़ के हाथ , तब मै तेरे द्वार आ पाऊं
ओ मेरे बाबा, आशीष से तेरे, तेरे लिए आज मै कुछ लिख पाऊ
शब्द हो तेरे, हाथ भले हो मेरे; उनसे मै कुछ लिख पाऊ
सुरीली धुनमे इन शब्दों को पिरों के, तेरे लिए आज कुछ गाऊ ।
दीजिए ऐसा वरदान, मै तुम्हारे गीत और भजन गाऊ
अपनी ही धुन में गाते गाते इन्हे, मै तेरे दरबार में आऊ ।
Armin Dutia Motashaw