मिल रहे हैं नयन से नयन आज-कल।
मिल रहे हैं नयन से नयन आज-कल।
हो रही है चुभन पे चुभन आज-कल।
सील रहे हैं सपनें भी हम आज-कल।
मिल रहे हैं हमारे स्मरण आज-कल।
तुम भी चलती रहो, मैं भी चलता रहूँ।
दो किनारे नदी के भी चलते रहें।
हो ही जायेगा सब कुछ समन ही,प्रिये।
मिट ही जाएगी सारी कुढ़न ही प्रिये।
द्वीप जलता रहे,मन भी चलता रहे।
निभ ही जाएगी सारी रशम ही , प्रिये।