तुम्हारा आना,तुम्हारा जाना
तुम्हारा मुस्कराना,
तुम्हारा सट कर बैठना,
तुम्हारा देखना,
तुम्हारा हँसना,तुम्हारा रोना,
ये सब याद है मुझे
और बाकी सब भूल गया हूँ,मैं।
वह पहाड़ पर चढ़ना
नदी में तैरना,
विद्यालय में पढ़ना
झंडा फहराना,
प्रभातफेरी में निकलना
गीतों में सुर मिलाना,
ये सब याद है मुझे
शेष भूल गया हूँ, मैं।
बहुत देर तक चुप रहना
पगडणडियों में घूमना,
गाँव को पकड़ना
शहर को जकड़ना,
हवा का सुरसुरना
पानी का ठंडा होना,
ये सब याद है मुझे
और सब भूल गया हूँ, मैं।
सूरज का निकलना
धरती का ऊँघना,
पेड़ों की परच्छाइयां
लोगों की कहानियां,
आन्दोलनों का निकलना
वाणी का कटना,
भारत का होना
भारत का खोना,
ये सब याद है मुझे
शेष भूल गया हूँ, मैं।
**महेश रौतेला