गज़ल
हवाओं में वतन की इस तरह बदलाव ला देंगे।
जमीं से एक मुट्ठी खाक लेकर हम उड़ा देंगे।।
गगन तक महक मिट्टी की हमें अब यूं है पहुंचानी,
हवाओं की महक में एक खुशबू और ला देगें
हमेशा ही महकती जाएगी इस देश की मिट्टी ।
कलम के जोर से जग को यहीं हम अब बता देगें।।
रहे या ना रहे अब हम नहीं है फिक्र कोई भी।
जगत में देश की मिट्टी का हम जौहर दिखा देंगे।।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित