अभिमान
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भारत की मिट्टी उगले सोना,
क्यू न हमको अभिमान होना
इस धरती पर जन्में महारथी,
जिस पर दुनियाँ अभिमान करती
पवित्र बड़ी यहाँ की नदियाँ,
अभिमान जिस पर करती नारियां
उच्चा खड़ा हिमालय देखों ,
अभिमान जिस पर हर एक को
यहाँ के भगवान बंशी वाले,
अभिमान जिन पर करते ग्वाले
यहाँ की नारी जैसे ज्वाला,
अभिमान जिस पर करती बाला
भारत देश हैं वीरों की धरती,
अभिमान इस करते हम भारती
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित