टपकते हैं आंसू सुनो मेरे अपनों
दर्द हो रहा है
गम से है मारे
जिंदगी ऐसी तन्हा हुई है
मुलाकात होती है खुद से हमारी
देखे जो सपने हकीकत हुए ना
किस्मत की आंधी ने उजाड़ा मेरा दिल
कसते हैं ताने हमको हमारे
जमाने ने दिल पर खंजर चलाए
नाता नहीं है गैरों से हमको कोई
अपने सिर्फ हाथ थामे खड़े हो
गिरे जो ठोकर खाकर कभी तो
यही दुआ है
मुझे मेरे अपने संभाले