बर्षों बाद
बर्षों बाद
बुढ़ापा आयेगा,
मैं बूढ़ा पेड़ सा
फूल विहीन हो जाऊँगा।
शाखायें मुझसे अलग हो
कहीं और चली जायेंगी,
मेरी ही ममता मुझे नोंच
समय की टहनी पर टका देगी।
या असामायिक ही मैं
फूल-फलों से लदा
जमीन पर आ जाऊँगा,
तूफानों के बीच
अकेला खड़ा रह जाऊँगा।
बर्षों बाद
उदास हो जायेगा जीवन,
मन की परतें चूने लगेंगी,
मैं स्मृति-खण्डहर में
बैठा मिल जाऊँगा।
*महेश रौतेला