गज़ल
मुझे पहले मिले होते शरारत और हो जाती।
जहां सब कुछ हुआ इतनी इनायत और हो जाती ।
जरा से तुम ठहर जाते जरा से हम ठहरे जाते।
कहीं इस दिल की धड़कन से मोहब्बत और हो जाती।।
लम्हें फिर ना मिलें शायद जो लम्हे खो दिए हमने।
मेरे दिल में बसी है जो तिजारत और हो जाती।।
तमन्ना थी कि कुछ पल के लिए एकांत मिल जाता।
उमा से आपको भी कुछ शिकायत और हो जाती।।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित