अब तो अक्सर घरों में खिड़की दरवाजे बंद मिलते है,
प्रेमचंद के देश में भी अब कहाँ प्रेमचंद मिलते हैं?
दौलत को पाकर ही खुश हैं, ज्ञानवान से लोग यहाँ,
दौलत को रखने वाले अब, दौलत से तंग मिलते हैं।
करते हैं कुछ बात बड़ी सी, करते हैं बस बातें ही,
बातों ही बातों में भी अब कहाँ वही रंग मिलते हैं।
ढूंढ लो तुम 'आकाश' में ऊपर, ढूँढ लो तुम इस धरती पर,
जहाँ नहीं तुम ढूँढ पाओगे, वहीं देव बाबू मिलते हैं।