ग़म
छुपाए बैठे हैं सीने में तेरा ही गम ।
काश तू देख लेती एक निगाह हमें, इस जनम;
तो कातिल यह दर्द हो जाता कुछ तो कम!
तुझे नासमझ बनना है, तो क्या करे हम !
तेरे प्यारसे पूछने पर, हो जाता यह दर्द थोड़ा कम;
कभी तो समझेगी तु, बस इसी इंतजार में बैठे हैं हम।
इतना भी न तड़पा हमें, ऐ दिलरुबा, के मौत मांगे हम
गर मौत आए तो उसके पहले झलक दिखाना, तब छूटेगा यह दम ।
Armin Dutia Motashaw