बहुत याद आते हो तुम जब हम अकेले होते है,
लगता है जैसे तुम पास होते तो कितना अच्छा होता,
तुम्हारी बाते,
तुम्हारी मुस्कान,
तुम्हारा जुठ मुठ नाराज होनाभी तो सच्चा होता,
मेरी आवाज को तुम सुनते रहते युही आंख बंद करके,
हो जाते तुम दुनिया की भीड़ से पराये
और मुजमे ही खो जाते,
मगर वो मंजर नही है साथ,
अब पहले से भी है नाजुक ये हालात,
गुजर जाएगा ये वक्त भी अब तन्हा रहकर,
हम तुझमे निखर आएंगे एक लम्हा बनकर,
मगर इस वक्त,
बहुत याद आते हो तुम ।।।।।
-कलम की स्याही