गर्द मेरे चेहरे पर थी ,वो चेहरा चमकता रहा अपना ,
ज़ख्म देकर मेरे सीने में , वो खंजर सहलाता रहा अपना ।
मैं गया सूकू की तलाश में उस तक, वो अपना दर्द सुनाता रहा
जो था हमराज मेरा , सबको मेरी बातें,मेरे लहजे में बताता रहा ।
मै गया तो था सूरज के पास ,शिकायत ले धुप की,
वो बैठा छाए में ,आईने चमकाता रहा ।
awadh