English Quote in Story by Subodhchandra

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करवा चौथ
हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का पर्व होता है। इसमें भी विशेष रूप से चतुर्थी तिथि जिस दिन रात्रि में चन्द्रमा उदय होने तक रहे, उस दिन करवा चौथ का व्रत होता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां प्रात: काल से ही निर्जला व्रत रखकर संध्या के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर और अपने पति का दर्शन कर जल ग्रहण करके व्रत का परायण करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि करवाचौथ का व्रत करना और व्रत की कथा सुनने से;
--> विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है,
-->उनके घर में सुख, शान्ति,समृद्धि आती है
-->और सन्तान से सुख मिलता है।

यह कहा जाता है कि
यह व्रत शक्ति स्‍वरूपा देवी पार्वती ने भोलेनाथ के लिए रखा था। इसी व्रत से उन्‍हें अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति हुई थी ।
भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को करवाचौथ की यह कथा सुनाते हुए कहा था कि पूर्ण श्रद्धा से इस व्रत को करने से समस्त दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-सौभाग्य तथा धन-धान्य की प्राप्ति होने लगती है। श्री कृष्ण भगवान् की आज्ञा मानकर द्रौपदी ने भी करवा-चौथ का व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से ही अजुर्न सहित पांचों पांडवों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों की सेना पर विजय हासिल की।

एक अन्य कथा के अनुसार देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ गया। असुर देवताओं पर भारी पड़ रहे थे।उन्हें हरानेके सभी कोशिश विफल होती देख, सभी देवता असुरों को हराने के हल प्राप्त करने हेतु ब्रह्मा जी के पास गये। उन्होने देवताओं से कहा कि वे अपनी-अपनी पत्नियों से कहें अपने पति की मंगल कामना और असुरों पर विजय के लिए इस व्रत के दिवस उपवास करें। इससे निश्चित ही देवताओं की विजय होगी। इसके बाद जब देवियों ने यह व्रत किया जिससे देवताओं की असुरों पर जीत हुई। माना जाता है तभी से इस व्रत का चलन हुआ है। .
करवा चौथ पर छलनी का खास इस्तेमाल होता है जिसकी परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन विवाहित महिलाएं पूजा की थाली में अन्य पूजन सामग्रियों के साथ छलनी को भी रखती हैं। करवा चौथ वाले दिन चाँद निकलने के बाद व्रती महिला पहले चाँद को छलनी से देखती हैं। साथ ही साथ उसी छ्लनी से पति को भी देखती है। चाँद को देखने के लिए महिलाएं छलनी में दीये को भी रखती हैं।

चाँद और पति को छ्लनी से देखने के बाद व्रती के पति अपने हाथों से उन्हें पानी पिलाकर व्रत पूरा करने के लिए कहते हैं। छ्लनी से चाँद देखने की इस परंपरा की कल्पना चंद्रमा और भगवान ब्रह्मा से की गई है। दरअसल मान्यता ये है कि चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है। साथ ही उन्हें लंबी आयु का वरदान प्राप्त है।

कथाएं चाहे कुछ भी हो……
हम सभीके जीवन में...
कुछ बदलाव,
कुछ आशाएं और
श्रृद्धा का सिंचन हो
यही भावना बनी रहे यह भी कुछ कम नहीं है।

हर एक उत्सव ही हमारे जीवन में उत्साह बढ़ाता है।

(sanklapit)

English Story by Subodhchandra : 111272561
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