चारों तरफ हैं खुशियों का मंजर
फिर भी एक कसक सी है दिल में
तुम बिन...
चारों तरफ सजी हैं महफिलें, लगे हैं मेले
फिर भी तन्हाँ है ये दिल
तुम बिन...
आज है पूरे चाँद की सुहानी रात
चाँद चांदनी के संग उफान पर
मुझे फिर भी लगता हैं
अमावस्या का अन्धकार
तुम बिन..._____