कोई पूछे कौन हूँ मैं? कह देना ऐसे ही, कोई खास नहीं, एक दोस्त है कच्चा पक्का सा, एक झूट है आधा सच्चा सा ,
ज़ज्बात के नाम पे पर्दा सा, मेरे जैसा एक बच्चा सा, जो पास होके भी पास नहीं, पर उससे छुपा कोई राज़ नहीं .,जो रूठ जाऊ तो मनाए, जो अपनी हर बात मुझे बताये, जो मेरे ग़म है जानता ,दुआ मेरे लिए है माँगता ,कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,कह देना कोई खास नहीं ”……