तू हमसफ़र, तू हम साया है,
तू अक्श मेरा,मुझमे समाया है ।
तू है, तो सितारों की क्या आरजू ,
हमें इल्म ,चाँद तेरा छाया है ।
अब न डरु,गर मौत भी हो मुकाबिल ,
तेरे वक़्त ने, मुझे इस तरह बनाया है ।
मैं क्या जानता नहीं गुनाह मेरे ,
मैं जमाने से, तू खुदा से छुपाता है ।
खबर है, तू मुझसे आँखे चुराता है ?
गिर न जाउ, अपनी हथेली पे चलाता है।
तू कभी चुप, कभी बातों से दिल दुखाता है,
तू तो आइना है ,सच ही दिखाता है ।
तू कहे तो, कल चले सितारों तक,
आश्मान बुलंदियों से आवाज़ लगाता है