आशमाँ भी झुक कर
देखो खुश हो जाता है।
नदी भी निर्मल बन
शीतलता दे जाता है।
पवन भी अपने स्पर्श
से तन को हर्षाता है।
किरण बिखेर सूर्य
मंद मंद मुस्काता है।
चाँदनी शीतलता से
चित प्रसन्न कर देता है।
सीख ले खुश होना
छोटी छोटी बातों में।
सोच इक पल को ज़रा
क्या गुजरा कल आता है?
कुदरत देकर औरों को
बेहद खुश हो जाता है।
फिर मानव पाने को
खुशी कैसे समझ लेता है?
देने का नाम ही खुशी है
बुद्धीजीवी नहीं समझ पाता है।
सोच इक पल को ज़रा
क्या गुज़रा कल आता है?