सुदंर कविता ..
विषय .सुकून ..
प्यार करने की जिंद न करो ,प्यार करना भी बड़ा महंगा हैं ।
यहाँ चाहने वालों की भीड़ बहुत हैं ,सच्चे प्यार का दीदार बड़ा महंगा हैं ।।
इश्क तो हर कोई कर लेता है ,पर इश्क के वादे निभाना बडा महंगा हैं ।
मंजनू तो यहाँ बहुत मिल जायेगें ,पर सच्चा प्रेमी मिलना बडा महंगा हैं ।।
बाजार में खिलोने तो बहुत मिलते है ,पर सच्चा प्यार खरीदना बडा महंगा हैं ।
प्यार की राह में कितने असफल हुए ,पर हीर रांझा की तरह आशिक मिलना बडा महंगा हैं ।।
आज मालुम हुआ ,प्यार करना बच्चों का खेल नही ।
हम सुकून को ढूँढने चले थे दुकानों में ,लोगो के दिल टटोल कर देखा तो ।।
आज सुकून के पल को पाना भी कितना महंगा हैं ।
सच्चे दिलबर के दर्शन हो जाए ,ये भी आज बडा महंगा हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला जिला डूँगरपुर ,राजस्थान ,हाल .अमदाबाद ।