सुदंर कविता ..
विषय .रोटी ..
जगत में रोटी महारानी की महिमा निराली हैं ।
रोटी महारानी के बिना जीवन खाली खाली हैं ।।
मानव रोटी कमाने दौडता ,रोटी पचाने भी दौड़ता हैं ।
भाग्यशाली को ही सहज में रोटी नशीब हो जाती हैं ।।
कोई कमनशीब जीवन भर रोटी को तरसते हैं ।
मेहनत की रोटी सुकून ,चैन ,अमन देती हैं ।।
बेईमानी की रोटी सुख ,चैन ,अमन छिन लेती हैं ।
भुखा व्यक्ति क्या पाप नही कर सकता हैं ।।
पेट की आग बुझाने मानव दानव बन जाता हैं ।
रोटी के लिए रात दिन मेहनत करनी पड़ती हैं ।।
तब कही जाकर रोटी महारानी के दशर्न होते हैं ।
हे ईश्वर तु सब को भुखा उठाना पर ,भुखा मत सुलाना ।।
सभी को पेट भरने रोटी मिले ऐसी कृपा करना ।
रोटी बिन मानव का जीना संभव नहीं हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।