मैं - यार पार्टी तो बहुत जानदार थी,
नौकर - साब सारा काम हो गया, बस ये कूड़ा करकट है जो सुबह ही जा पाएगा,
सोहन - अरे सुबह तक इस कूड़े को घर में रखके सड़ाना है क्या? पड़ोस वाले खाली प्लॉट में डाल दो और बस काम खत्म, कौन सा कोई रहता है वहाँ |
मुझसे रहा नहीं गया तो मैं बिना कुछ बोले कूड़े की एक बोरी उठा कर पड़ोस में सोहन के चाचा की छत पर फैला आया और बोला लो आधा काम तो मैंने ही खत्म कर दिया |
सोहन झल्लाहट में बोला, "तुम्हें पता है ना चाचा की का घर है, क्या बदतमीजी है ये?"
मैं - हां लेकिन वो तो दो महीने के लिए बाहर गए हैं ना, कौन सा कोई राह रहा हैं वहा अभी, किसे पता चलेगा किसने डाला, बस काम खत्म करो |
सोहन समझ गया उसका सर झुक गया तभी नौकर मेरे पास आकर धीरे से बोला वाह क्या गांधीगिरी है |