सुदंर कविता ..
हसीन ख्वाबों को पलकों पर ,अपनी कभी तो सजाया करो ।
प्रेम की बारिश में कभी कभी ,तो भीग जाया करो ।।
दर्द का बोझ ले के ,अकेले अकेले क्यूं सिसकते हो ।
अपने गमो को यूं न ,हमसे अब छिपाया करो ।।
सच है तेरी खामोशी हर समय ,चुभती रहती मुझको ।
मेरी उलझनो को इस तरह ,न ओर बढाया करो ।।
यूं तो हर शख्स अपने आप में ,गुम सदा रहता हैं ।
कुछ रस्में उलफत की ,हमसे भी निभाया करो ।।
कसम से ये दिल चमन तेरी ,यादों के फूलो से ही महकता हैं ।
चंद धडी फुरसत में रुबरु हो कर ,अपने दीदार कराया करो ।।
एक खुशी सी मिल जाती है ,तुम्हारे पास आने से ।
प्यार में तुम कभी कभी तो ,खिलखिलाया भी करो ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।