तेरा आना तेरा जाना
मुझे पागल कर ही जाता है।
तेरी मुस्कान है कातिल
मुझे घायल कर ही जाता है।।
तू आता है मेरी सोच में
हकीकत में तो बहुत दूर है।
तू खुश है अपनी दुनिया में
और मुझ पर छाया तेरा ही फितूर है।।
कुछ छणों का रिश्ता हमारा
भुला दिया मैंने जग सारा।
तेरी एक फरमाइश से
कर दिया तूने दूर किनारा।।
तेरी उन साँसों की गर्मी
मेरे कानों में आज तक गूँज रही।
तेरे काँपते शब्दों की फरमाइश
जैसे मेरे होठों को चूम रही।।
थी नादान मैं पागल भी
लव सव से भी थी अंजान।
खोल दिया खुद को मेरे सम्मुख
ना समझी कुछ, मैं भी कैसी मूरख इंसान।।
याद आती है तेरी वही
जिद और तड़पती बातें।
दिन तो बीत जाएं मेरे
पर कटती नहीं रातें।।
इस दुनिया में प्यार का
बस यही एक रूप होता है।
लेने देने का खेल है ये
कोई पछताता तो कोई रोता है।।
गलती तेरी नहीं थी शायद
तूने ही बस नियंत्रण खोया था।
मैं ही मूरख जड़बुद्धि थी ऐसी
समझ न पाई तू कितना रोया था।।
अब बस यही दुआ है मेरी रब से
तू जहाँ रहे खुश रहे आबाद रहे।
मेरा है क्या मैं धरती हूँ
हर शय में तू ही मेरा आसमान रहे।।
Archana yaduvansi