?निश्चय ही इस मानव जीवन में हम पाना तो बहुत कुछ चाहते हैं... हमारी पाने की ललक किस रूप में हैं ये हम पर निर्भर करती हैं... अब बात ये आती हैं कि इस दुनियां में हर महत्वकांक्षी किसी ना किसी को फालो करता हैं या किसी के बात करने और उससे ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता रखता हैं उसमे में होती हैं जो ग्रहण करने की शक्ति रखता हैं.... यदि ये भाव किसी में होता हैं तो वो निश्चित ही भीड़ से अलग होता हैं.... क्योंकि वो अपनी इस कला का इस्तेमाल अपनी कला को निखारने में करता हैं... इसी लिए इस दुनियां में कोई भी वेबजह नहीं हैं ईश्वर ने अल्लाह ने सब में कुछ ना कुछ विशेष दिया हैं जिसको ग्रहण करना गलत नहीं हैं... कौन किसकी सफलता में किस रूप में सहभागी हों... और हम एक दूसरे के काम आ सके.. जो यही प्रकृति का नियम हैं.... ?