कही देर न हो जाये |
कही देर न हो जाये |
परदेश गये हो बरसो से |
यु दूर गये हो नज़रो से |
अब नज़रे भी कम हो रही है.. |
तेरी सुरत भी आंखो से ओजल हो रही है |
अब तो आजा एक बार.. अपने देश |
अब बहुत रहे लिया.. विदेश |
कही थम न जाये सासों की लड़िया |
तुझे याद कर रही है तेरी खिलोने की गुड़िया |
बचपन बिता, हाथो से खिलौना छूटा
जवानी बीती, तेरी हर कहानी मिट्टी
बस गया परदेश.. तू
लगा गया हर दिल को ठेस तू...
छूट रहे है.. हर मुकाम...
तेरी सब यादें हो रही है तमाम |
न रही हाथो मे यारियां..
न रही दिलदारियां.. |
तेरी आहट से होती थी किलकारियां..
वो अब बन गयी पुरानी कहानियाँ..|
आखिर क्या है.. तेरी मजबूरियां.. तेरी मजबूरियां...
कही देर न हो जाये |
कही देर न हो जाये !!!!