शेर की दहाड़ सुन, बुजदिल कांप रहा है अब,
अब क्या होगा अब क्या होगा जाप रहा हे अब।
कश्मीर घाटी को हथीयाने, ७० साल षड्यंत्र रचे,
डर के मारे सोच रहा अब, कैसे बचाए POK।
मूर्ख पड़ोसी अब मत सोच, शुरु करदे दिन गिनना,
बचा ना पाएगा POK, सिंध बलूचभी खो देगा।
गीदड़ कोई बोला था, छू ना पाओगे तुम ३७०,
सन्न रहगया देखकर वो, शेरो की इस चाल को।
विश्वास हमें है अब घाटी में, अमन शांति आएगी,
खत्म होगा आतंकवाद, विकसित होगा कश्मीर।
प्रग्नेश परमार। "हिंदुस्तानी"