प्रभाति - प्रार्थना
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जागो - जागो केशव जागो ,
आलस्य छोडो नीद्रा त्यागो,
भोर की बेला आई सुहानी,
कोयल की ये सुनलो वाणी,
जाग उठे सब गाय - ग्वाले,
तुम बिन इनको कौन संभाले,
जागो - जागो आँखे खोलो
स्नान करलो मुँह को धोलो,
चंदन का ये तिलक लगालो,
पीला पीताम्बर तन पर धारो,
माखन मिश्री का भोग लगालो,
पान - सुपारी का बीड़ा चबालो ,
जागो - जागो मुरली उठालो,
सुन्दर सी एक तान सुनादो,
तुम हो सृष्टि के पालनहारी,
तुम बिन कौन करे रखवाली ।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित