काश !!!!
लौट आता वो पल.
बस एक बार
वो ठहेरता मेरी आॉखो मे;
मोती बनकर झिलमिलाता
चमकता चहेरे पर
सूरज की लाली लाता
काश!!!
लौट आता वो पल,
बस एक बार,
समुंदर के मौजो की तरहा
लहेराता लहेराता वो
पहेलू मे हमे छूपा लेता
समी सांज जैसे सूरज को
काश !!!!
वो आता ऐक बार...........