है भूलना बेहतर टूटा कल ,
वो दर्द तुम्हारा बीता पल ,
अपनी आँखों के आँसू तुम ,
क्यूँ बेकार बहाये फिरते हो !
देख रहे सब तुमको यहाँ ,
पर नज़र तुम्हारी सूनी है ,
उठ जाओ फिर मुस्काओ तुम ,
क्यूँ मातम मनाये फिरते हो !
चलो दूर अभी जाना है ,
तुमको तो सबको हँसाना है ,
छोड़ो उन अाधे सपनों को ,
क्यूँ ख़ुद को सताये फिरते हो !