दस शेर
जिस तरह से आपका अंदाज कातिल हो रहा
अनगिनत दिल आज शायद धड़कना ही छोड़ दें 1
ए तुम्हारी जुल्फ अनगढ़ राह की पगडंडियाँ
सुलझा हुआ इन्सान भी उलझे बिना रहता नहीं 2
सजाकर आ गये हो जब अलक्षित तीर भौहों पर
निशाने पर निगाहें रख निशाना चूक मत जाना 3
हाहाकारी रूप के रुखसार पर इक तिल नहीं
लग रहा है खुदा भी कुछ तो किफायत कर गया 4
दिल किया बरबाद उसका रंच भर भी गम नहीं
गम यही बरबाद करने में किया देरी बहुत 5
बला की शोखियाँ तेरी सुहानी शाम का मंजर
जुल्फ की इन घटाओं से कयामत ही न आ जाए 6
बड़े ही जान लेवा हैं तिरीछे नैन के खंजर
अलक्षित तीर से शायद किसी का खून हो जाए 7
रूप ढलने से तुम्हारी अहमियत कब कम हुयी
यूँ समझ लो तुम मेरी कविता की छूटी पँक्ति हो 8
ए तेरी सावन की नदिया सी उफनती धार पर
आज कोई भी यहाँ तटबन्ध टिक सकता नहीं 9
हम तो घायल हो चुके थे इन तिरीछे तीर से
या खुदा अब ए तबस्सुम जान लेवा हो रही 10
Kuber Mishra