वहाँ बैठना जरूरी है
बैठे-बैठे,
लोगों का आना-जाना भी देखना है,
आने-जाने की महक अद्भुत होती है।
बहुत बार हम अकेले होते हैं
आदमी का दिखना ही
बहुत बड़ी बात होती है।
शव आदमी का मिले
तो डरावना लगता है,
शव जनावर का सामान्य लगता है।
वहाँ बैठना जरूरी है
बैठे-बैठे,प्यार की प्रतीक्षा
जीवन को भर-भरकर,लबालब करती है।
आशा-आकांक्षाओं की भीड़ में
इधर-उधर झांकना
अकेलेपन को मारना है।
*महेश रौतेला