#KAVYOTSAV -2
"आओ दिवाली मनाते हैं"
जगाते हैं कुछ नए सपनें, मनाते है कुछ बिछड़े अपने,,
भूली बिसरी पुरानी यादों का, सिलसिला फिर से चलाते हैं,,
आओ दिवाली मनाते हैं।
दे मँगल आशिर्वाद बच्चो को, झुक बड़ो के चरणों में जाते हैं,
मिल कर गले भाई-यारों के, नफ़रत के पटाख़े जलाते हैं,,
आओ दिवाली मनाते हैं।
कर गयी थी जो दूर अपनों से, वो गलतियां मिलकर मिटाते हैं,,
कुछ हम भुलाते हैं, कुछ उनसे भुलवाते हैं,,
आओ दिवाली मनाते हैं।
घमण्ड ईर्ष्या लालच नफरत,दीपों से इनको जलाते हैं,,
प्यार भाईचारा सौहार्द एकता,एक नया उजियारा फैलाते हैं,,
आओ दिवाली मनाते हैं।।??
"राजीव कुमार गुर्जर"