#Kavyotsav -2
****माँ****
जिसने पूत को
पाला – पोसा
बड़ा किया
उसी ने
बुढ़ापे में
चौराहे पर
खड़ा किया
क्या कसूर था
उसी बूढी माँ
का जिसने
नौ माह कोख
में पाला
खून – पसीना
बहा अपना
तन – मन
उस पर
न्योछावर किया
पूत – कपूत
हो जाये
पर माता हुई
न कुमाता
माँ की ममता
कभी न होगी कम
बहेगी ममता की
सरिता हरदम
हरदम हरदम |
*************
कवि कपिल खंडेलवाल ‘कलश’
कोटा (राजस्थान)