कोई दो मित्रो के बीच दोस्ती टूटने के बाद बहोत ही गहरा दर्द होता है। जो सदा एक दूसरे को अपनी और खींचने का प्रयास करता है।जब एक दोस्त दोस्ती टूटने के गम में दूसरे दोस्त को वापिस दोस्त बनने का बुलावा देता है तो वो केसे निवेदन करता है और किस प्रकार के दर्दभाव उसमे उभर रहे होते उसे वर्णीत करने का प्रयास मेने प्रस्तुत रचना में किया है।अगर आपको ये रचना पसंद हो तो प्रतिभाव के तौर पर कमेंट एवं रेटिंग्स के जरिये जरूर बताएं।
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*लौट आ ए मेरे दोस्त।*
जलने के बावजूद कोयला संबंध रखता है आग से;
तप दोस्ति का होता है प्रेम पाने को,पर शुरू होता है त्याग से;
अरे अब तो ये दिल भी तेरे नाम हो जाना चाहता है;
लोग नाम मेरा पूछते है और मुह से नाम तेरा निकलता है।
में डूबा देना चाहता हु मेरी हर गलती-ए-कश्ती को;
लौट आ ए मेरे दोस्त,
ये सुना हाथ मेरा आज भी तरसता है तेरी दोस्ती को।
आंखों को प्यारी रोशनी है ,पर चाहत गेहरी है अंधेरो से;
अक्शर गलती हमारी हो और हम चाहते है कबुलात गेहरो से;
माना इस बार गलत में था,पर तुजे तो मैने बताया था ना;
में भटक जाने वाला राही हूं, मुजे सही राह दिखाएगा ना;
गलती करता नौशिखिया हूं, सही गलत सिखाएगा ना;
क्यों अब तू याद नही करता हमारी मस्ती को,
लौट आ ए मेरे दोस्त
ये सुना हाथ मेरा आज भी तरसता है तेरी दोस्ती को।
तेरे जाने से अकेला में कायर सा बन गया हूं;
बिछड़ने के तेरे ग़म में शायर सा बन गया हूं;
देख ये मेरी आँखों की नमी, तुजे पिघलाने की ताकत रखती है;
मेरी सिसकिया भी ना सुन सके क्या इतनी तेरी सख्ती है;
चल तोड़ देता हूं में भी आज,यार तेरी यारी इस सस्ती को;