साहसी
तुम साहसी हो साहेब
लड़ते नहीं थकते
सोते - जागते
उठते - बैठते
खड़े हो - होकर
समाज से, देश से , जिंदगी से
जिंदगी भर
बैठने के लिए।
जिंदगी से जिंदगी भर
हम लड़ते हैं
बालिश्त पेट के लिए
सो जाते हैं
जब थकते हैं
जिंदगी भर न उठने के लिए
तुम्हारी लीला अपरम्पार है
तुम तो मर मरके भी
जी उठते हो
सिर्फ और सिर्फ
बैठने के लिए