काव्योत्सव2.0
एक बेटी द्वारा माँ को समर्पित...
"मैं हूँ माँ की प्यारी बेटी"
मैं हूँ माँ की प्यारी बेटी,
उनकी राजदुलारी बेटी।।
सारे जतन वो करती हैं,
मन ही मन वो कहती हैं,
उम्मीदों के पंख लगाकर,
वो सपनों को बुनती हैं,
फूल खिलेंगे इस उपवन में,
मैं बगिया की क्यारी बेटी,
मैं हूँ माँ की प्यारी बेटी,
उनकी राजदुलारी बेटी।।
मैं क्या चाहूँ, क्या ना चाहूँ,
सारी बातें सुन लेती हैं,
मेरे कहने से पहले ही,
आशाओं को चुन लेती हैं,
चरण कमल रज शीश झुकाऊं,
मैं गंगा जलधारी बेटी,
मैं हूँ माँ की प्यारी बेटी,
उनकी राजदुलारी बेटी।।
आसमान में जुगनू बनकर,
एकदिन मैं भी चमकुंगी,
लाऊंगी तारों को तोड़कर,
आँचल उनका भर दूँगी,
माँ के दिल की एक तमन्ना,
ऊँचा तू उड़ जा री बेटी,
मैं हूँ माँ की प्यारी बेटी,
उनकी राजदुलारी बेटी।।
-राकेश सागर