पिता
वो जो मुझे सवारने के लिए
खुद को कण-कण में बीखराले
भले ही उनकी बूँद बूँद रिस जाए
पर कभी चिंता कि टीस ना उठ पाए
मेरे पिता जो लिए हुए है
भुजबल महावीर सा
जो मर्यादाएं लिए हुए पुरुषोत्तम सी
जो त्याग करें भाई भरत सा
जो समर्पण लिए हुए दशानन सा
वो आज्ञाकारी मेघनाथ से
वो समेटे बैठे है खुद में कई रामायणें
वो है मेरी पूजा वो है मेरे पिता
*भरत कुमार*
#kavyotsav -2