kavyotsv 2
स्वरचित
आखिर किस पर विश्वास करें_
दादू अंकल भैया सारे
घर पड़ोस के बाहर वाले।
ऊपर से अच्छे दिखते हैं
चिकनी चुपड़ी बातों वाले।।
टॉफी का लालच दे करके
बच्चों को फुसलाने वाले।
अनजान जगह पर ले जा कर
हैवानियत दिखाने वाले।।
कभी कभी यह सारे अपने
बेरहम क्यों बन जाते हैं।
अपने मन के राक्षस को
बस में क्यों नहीं कर पाते हैं।।
बच्चे तो भगवान का रूप हैं
फिर इन पर जुल्म क्यों ढाते हैं।
नशा और पागलपन में क्यों
गलत काम कर जाते हैं।।
बड़ी बड़ी गलती करके फिर
बाद में शायद पछताते हैं।
घर वालों को दुःख देते और
स्वयम् सजा वह पाते हैं।।
कोई बताये कि हम बच्चे अब
आखिर किस पर विश्वास करें।
किसको समझें अपना और
किससे बच कर दूर रहें।।
नम्र निवेदन है इन सब से
अपने मन पर क़ाबू पाएं।
अच्छे अंकल अच्छे दादू
अच्छे भैया बन जाएँ।।
जमीला खातून
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