रंग
क्या रंग हि पहचान है
क्या रंग हि उनवान है
अगर हाँ तो ये दुनीया महज एक शमशान है
क्यों हरा ही तेरी शान है
क्यों भगवा ही मेरा गुमान है
लगता है अब खुद को समझ बेठे भगवान है
रंग रंग करते तुमने सब कुछ बेरंग कर डाला
अब तो लगता है की तुमने अंदर के इन्सान को ही मार डाला
रंग रंग करने वालो मुझे सिर्फ इतना बता दो
क्यों रंग की इबादत है
क्यों रंग की ही पूजा है
सच मे तो ये कहा दूजा है
रंग के गुरुर मे
रंग के सुरूर मे
ये रंग का ही जोर है
ये रंग का ही शोर है
ये रंग ही तो काल है ये रंग ही फैताल है
असल मे तो ये सिर्फ विनास का जाल है
भरत कुमार
#kavyotsav -2