#KAVYOTSAV -2
*## शहादत ##*
मात्र-भूमि के कण-कण में,
वीरों का लहू समाया है,,
कहीं अशफाक शहीद हुए,
कहीं विस्मिल को लटकाया है।
भगत सिंह ने फाँसी चूमी,
मरते-मरते मुस्काये थे,,
जो चन्द्र शेखर गुर्राए थे,
सारे दुश्मन थर्राए थे।
खूब लड़ी झांसी की रानी,
मर्दानी कहलाई थी,,
मंगल पांड़े ने ताना सीना,
कितनो ने गोली खाई थी।
लाखों लाल शहीद हुए,
तब माँ को तिलक लगाया था,,
पर कुछ धूर्त फरेबी पुतलो ने,
श्रेय आजादी का पाया था।।
बटवांरा जब हुआ देश का,
वो सुभाष भी रोया होगा,,
मर मिटे स्वतंत्रता पाने को,
क्या यहि भविष्य बोया होगा।
आज के नेता क्या जाने,
क्या शहादत होती है,,
अपना उल्लू सीधा करने को,
मेज़ थपथपाई जाती है।
सरकार चलाने को अपनी,
हिन्दू-मुस्लिम चलवाते है,,
जब गले ना दाल कहीं पर तो,
गठबंधन भी कर ज़ाते हैं।।
ज़ाने क्या क्या सहता भारत,
फिर भी ध्वजा फिराता है,,
चंद देशभक्तो के दम पर,
दुनियां मे जाना जाता है।
भूल चुकी सारी दुनियाँ,
मैं उनकी याद दिलाता हूँ,,
नमन है उन वीरो का मेरा,
जो साँस खुले में पाता हूँ।
नमन है उन वीरों को मेरा,
जी साँस खुले पाता हूँ।।
"राजीव कुमार गुर्जर"