Hindi Quote in Poem by Manoj kumar shukla

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रानी दुर्गावती का, अमर रहा इतिहास.....

रानी दुर्गावती का, अमर रहा इतिहास.....

रानी दुर्गावती का, अमर रहा-इतिहास।
वीर पराक्रम शौर्य की, बजी दुन्दभी खास।।
पंद्रह सौ चैबीस में, कीर्ति पिता की शान।
दुर्गाष्टमी के पर्व पर, कन्या हुयी महान।।
माँ दुर्गा का रूप थी, दुर्गावती सुनाम।
मातपिता हर्षित हुये,माँ को किया प्रणाम।।
राजमहल में खेलकर, तरकश तीर कमान।
बच्ची बढ़ युवती हुयी, सभी गुणों की खान।।
सुतवधु नृप संग्राम की,दलपत की थी जान।
चंदेलों की लाड़ली, गौंड़वंश की शान।।
दलपतशाह-निधन पर, थामी शासन-डोर।
सिंहासन पर बैठ कर, पाई कीर्ति-अँजोर।।
किया सुशासन हो अभय, फैली कीर्ति जहान।
नन्हें वीर नारायण, में बसती थी जान।।
शासन सोलह वर्ष का, रहा प्रजा में हर्ष।
जनगण का सहयोग ले, किया राज्य-उत्कर्ष।।
ताल तलैया बावली, खूब किये निर्माण।
सुखी प्रजा सारी रहे, पा विपदा से त्राण।।
सोने की मुद्राओं से, भरा रहा भंडार।
योद्धाओं की चैकसी, अरि पर सतत प्रहार।।
हुये आक्रमण शत्रु के,विफल किये हर बार।
रणकौशल में सिद्ध थीं, सब सेना-सरदार।।
थे दीवान आधार सिंह, हाथी सरमन साथ।
दुश्मन पर जब टूटते, शत्रु पीटते माथ।।
बाजबहादुर को हरा, किया नेस्तनाबूत।
बुरी नजर जिनकी रही, गाड़ दिया ताबूत।।
अकबर को यशखल गया,करी फौज तैयार।
आसफखाँ सेना बढ़ा,आ धमका इस बार।।
समरांगण में आ गईं, हाथी पर आरूढ़।
रौद्ररूप को देखकर, भाग रहे अरि मूढ़।।
अबला को निर्बल समझ, आये थे शैतान।
वीर सिंहनी भिड़ गयी,धूल मिलाई शान।।
वीरों का सा आचरण, डटी रही दिन रात।
भारी सेना थी उधर, फिर भी दे दी मात।।
चैबिस जून घड़ी बुरी, आया असमय पूर।
अरि-सेना नाला नरइ, घिर रानी मजबूर।।
तीर आँख में आ घुसा, तुरत निकाला खींच।
मुगल-सैन्य के खून सेे, दिया धरा को सींच।।
बैरन तोपें गरजतीं, दुश्मन-सैन्य अपार।
मुट्ठी भर सेना लिये, जूझ रही थी नार।।
अडिग रही वीरांगना, अंत सामने जान।
शत्रु-सैन्य से घिर गई, किया आत्म-बलिदान।।
गरज सिंहनी ने तभी, मारी आप कटार।
मातृभूमि पर जान दे, सुरपुर गई सिधार।।
मरते जीते हैं सभी, यश अपयश की आस।
जीवन तबही सार्थक, जो रचता इतिहास।।
जब नारी शक्ति बने, तब दुश्मन का नाश।
स्वर्णाक्षरों में लिख गई,वीरांगना इतिहास।।

Hindi Poem by Manoj kumar shukla : 111165094
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