देखो लंका जीत चले रघुराई धर्म ध्वजा चारों और फ़ैराई
लखन हनु और मैया सीता ख़ूब मनोरम परमपूनिता
चारों और हो धर्म का उज़ियरा कारण इए रावण को मरा
पिता की आज्ञा पालन हेतु धरती मैया तारण हेतु
राम रूप धरा हरी ने
देखो परमप्रभु आलोकिक माया
चरण छुआ के अहिलया तारा
जुठे बेर सबरी के खाए राम प्रभु भी क्या क्या स्वाँग रचाए
फिर पुष्पक विमान प्रभु ने मँगाया
सीता समेत बैठे रघुराया
दंडकवन में हरी है आए
ऋषिवर हर्सित दर्शन पाए
अवधपुरी रघुनंदन आए
घर घर में है मंगलगाए
ख़ूब सजी है अयोध्या प्यारी, सुंदर मनोरम सबसे न्यारी
भाई भरत को गले लगाया
सिंघासन बैठे रघुराया
जग ने बोला राजा राम पतितपावन जय सियाराम
:- भरत कुमार
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