#kavyotsav2
NAZM - "तुम याद आ जाते हो"
दौड़ते,भीगते,हाँफते हुये
वो गुलमोहर की शोख शाख़
जिसकी छाँव में जिसकी गोद में
लेते थे पनाह हम दोनों
जब भी भीगती है बारिश में
वो गुलमोहर की शोख शाख़
तुम याद आ जाते हो,
वो काफ़ी जूना एक दरवाज़ा
जिसकी ओट में जाने जाना
छुप जाते थे तुम बचपन में
अब मेंहदी तोड़ने के बहाने
जाता हूँ तुम्हारे आँगन में
जब भी देखता हूँ वो दरवाज़ा
तुम याद आ जाते हो,
अपने दिन का सारा वक़्त
जब नॉवेल पढ़ के काटती थी
सफ़्हे पलटने की आवाज़ें
मुझको सुनाई देती थीं
अब जब भी तुम्हारे नॉवेल के
सफ़्हे हवा पलटती है
तुम याद आ जाते हो,
रात को सोने से पहले
जब नींद से जंग फ़र्माते हैं
जब शीशे की खिड़की से
चाँद को तकने जाते हैं,
याद करने को मेरा
जब अहबाब कोई न होता है
तुम याद आ जाते हो,
written by-"NISHANT"