ए जिंदगी! आज इतनी ठोकरें खाकर भी संभल गए है हम,
तो आगे भी संभल ही जाएंगे अपने-आप,
जिंदगी में अब न किसीके साथ की तमन्ना है,
हम एक ही काफी है ज़माने-वालो की बोलती बंद करने के लिए,
मंज़िल को इतनी शिद्दत से पाने की कोशिश करो,
तुमसे पहले पुरी कायनात लग जाए तुम्हें उससे मिलाने के लिए,
मंझिले ज़िद्दी है तो क्या हुआ?
उसे पाने के लिए हम उससे भी ज्यादा ज़िद्दी है।